कर्म और कर्मफल: FEAT Theory ABC के अनुसार Action और Result के बीच Time Gap क्यों बनता है?


कर्म का अर्थ है — हमारे द्वारा किया गया प्रत्येक action।


हमारा हर छोटा से छोटा और बड़ा से बड़ा कार्य कर्म का निर्माण करता है। उन सभी कर्मों का जो परिणाम हमें जीवन में प्राप्त होता है, उसे कर्मफल कहा जाता है। जीवन में हमें जो भी मिलता है, वह किसी न किसी रूप में हमारे अपने ही कर्मों का परिणाम होता है।


यदि मनुष्य के कर्म नकारात्मक दिशा में जाने लगते हैं, तो उनके परिणाम भी नकारात्मक दिशा में आने लगते हैं। प्रत्येक action value एक reaction value अवश्य बनाती है। इसलिए universe हमें वही लौटाता है, जो हमने अपने actions के माध्यम से create किया होता है। उस action-energy का result अंततः हमारी body को receive करना ही पड़ता है।


अब यहाँ कुछ बहुत interesting facts जुड़ते हैं।


कर्म तो सभी करते हैं। लेकिन कई बार जो लोग अच्छे कर्म करते हैं, उन्हें उस समय उनका अच्छा परिणाम, यानी अच्छा कर्मफल नहीं मिल पाता। वहीं कुछ लोग जीवन में बहुत सारे नकारात्मक कर्म करते हैं, फिर भी उन्हें उसी समय नकारात्मक कर्मफल नहीं मिलता।


तो समझने वाली बात यह है कि यह कैसा system है, जिसमें ऐसे apparent errors दिखाई देते हैं?


अच्छे कर्म का अच्छा फल समय पर क्यों नहीं मिलता?

बुरे कर्म का बुरा फल उसी समय क्यों नहीं मिलता, जब मिलना चाहिए?

Actions और results के बीच इतना time gap क्यों बनता है?


कुछ बच्चे अपने जीवन में बहुत मेहनत करते हैं। इसका मतलब उन्होंने अच्छा कर्म किया। लेकिन उनका कर्मफल कहाँ गया? उन्हें समय पर सफलता क्यों नहीं मिली? कई बार सफलता 4–5 साल बाद मिलती है, और कई बार तो मिलती भी नहीं।


कुछ लोग murder जैसे बड़े अपराध तक कर देते हैं, लेकिन उन्हें तुरंत punishment नहीं मिलती। यदि मिलती भी है, तो कभी 20 साल बाद, कभी 30 साल बाद। तो negative कर्मफल में इतना बड़ा time gap कैसे बनता है?


इस कड़ी को समझने के लिए हमें FEAT Theory ABC के principles पर चलना होगा। तभी यह समझ आएगा कि actions और results के बीच time gap uncertain क्यों होता है।


आइए इसे गहराई से समझते हैं।


हमारी body पाँच तत्वों से मिलकर बनी है — Fire, Water, Earth, Sky और Air।


सभी लोगों की body इन्हीं पाँच elements से बनी होती है। तो क्या इसका मतलब यह है कि सभी की body एक जैसी है?


नहीं। सभी की body एक जैसी नहीं होती।


इस तथ्य को deeply समझना जरूरी है।


हर व्यक्ति के शरीर में ये पाँचों तत्व तो होते हैं, लेकिन किसी की body में किसी particular element का concentration level बहुत अधिक हो जाता है, और किसी की body में किसी particular element की deficiency create हो जाती है।


FEAT Theory ABC में इसे Elemental Concentration Level कहा गया है।


इसी concentration level की वजह से हर व्यक्ति की body अलग होती है। हर व्यक्ति का body behavior, mind behavior और mindset अलग-अलग होता है। यही पाँच elements किसी व्यक्ति के thought process को बनाते हैं।


किसी को बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है।

कोई शांत रहना पसंद करता है।

कोई emotions पर control नहीं रख पाता।

कोई व्यक्ति अपने emotions को balance कर पाता है।


हम सभी जानते हैं कि meditation से emotions काफी हद तक control में आ सकते हैं। लेकिन फिर सभी लोग daily meditation क्यों नहीं करते? सभी लोग एक जैसा behave क्यों नहीं करते?


एक व्यक्ति meditation properly कर पाता है, लेकिन दूसरा क्यों नहीं कर पाता?


इसका simple answer है — mindset के patterns अलग-अलग होते हैं, और ये patterns elements के concentration level के कारण बनते हैं।


कुछ लोगों में किसी element का concentration बहुत high और imbalanced होता है। कुछ लोगों में कुछ elements almost negligible होते हैं। इन्हीं कारणों से हर व्यक्ति का mindset और thought process अलग तरह से प्रभावित होता है।


यही कारण है कि कोई व्यक्ति murder करते समय भी नहीं डरता। कोई व्यक्ति अपनी ही बेटियों की हत्या कर देता है और उसे 1% भी guilt या regret नहीं होता। वहीं दूसरी ओर कोई व्यक्ति एक मच्छर तक को मारने में सोचता है, क्योंकि उसके emotions बीच में आ जाते हैं। वह सोचता है कि उसके अंदर भी प्राण हैं, उसके अंदर भी जीवात्मा है, उसकी क्या गलती है।


तो प्रश्न यह है कि कोई व्यक्ति एक insect को मारने में भी इतना सोचता है, और कोई व्यक्ति murder करने में भी नहीं सोचता — ऐसा क्यों?


अक्सर लोग कहते हैं कि यह सब परवरिश के कारण होता है। लेकिन क्या सच में केवल family upbringing ही इसका कारण है?


कौन से माता-पिता सच में अपने बच्चों को बिगाड़ना चाहते हैं? कौन से माता-पिता अपने बच्चों को गलत रास्ते पर भेजना चाहते हैं?


वास्तव में यह केवल परवरिश के कारण नहीं होता। यह behavioral patterns elements के अनुसार बने होते हैं।


मान लीजिए मेरी बेटी है और मैं हूँ। हम दोनों की body के पाँच elements आपस में interact करते हैं। इस interaction के कारण हमारे बीच mindset और behavior में difference बनता है।


मैं अपने बच्चे को कोई बात समझा रहा हूँ, लेकिन मेरा बच्चा उस information के प्रति अलग तरीके से behave करता है। इसका कारण है — Element Transfer Process।


Universe में elements के infinite levels of concentration मौजूद हैं। Elements हमेशा higher concentration level से lower concentration level की तरफ transfer होते हैं।


मान लीजिए मेरी body में Fire element बहुत high है और मेरी बेटी की body में Fire element low है। जब भी हम दोनों interact करेंगे, बात करेंगे या साथ में समय बिताएँगे, तो मेरी body से Fire element का flow उसकी body की तरफ होगा। क्योंकि उसके शरीर में Fire कम है और मेरे शरीर में Fire अधिक है।


इस तरह जब-जब हम interact करेंगे, elements transfer होंगे। यही transfer body के concentration level को change करता है।


ठीक इसी तरह, real time में हमारी body के elements concentration level कई तरीकों से बदलते रहते हैं। इसी कारण हमारे emotions और thoughts drive होते हैं।


और यही emotions व thoughts हमें कोई भी action करने के लिए प्रेरित करते हैं।


हम जो भी action करते हैं, उसका reaction या outcome हमें definitely receive होता है, क्योंकि उस action के creator हम स्वयं हैं। उस action-energy के creator भी हम ही हैं।


Energy कभी destroy नहीं होती। केवल उसका रूपांतरण होता है। Energy अपनी state बदलती है।


इसलिए हर action का outcome आता है। यानी कर्मफल बनेगा ही। और क्योंकि उस कर्मफल के creator हम हैं, इसलिए वह कर्मफल हमें at any cost receive होगा।


अब body के पाँच elements का concentration level इस कर्मफल की intensity को कम या ज्यादा कर सकता है।


क्योंकि यही elemental concentration level हमें दूसरे लोगों से अलग बनाता है और हमारे पूरे जीवन के outcomes को change कर देता है।


जैसे यदि कोई व्यक्ति murder करता है, तो उसके bad कर्मफल की intensity अलग-अलग हो सकती है। यह उस व्यक्ति के पाँच elements के concentration level पर depend करता है।


यदि उस व्यक्ति की body के पाँचों elements का concentration level ज्यादा balanced और strong है, तो उसकी body negative कर्मफल के effect को लंबे समय तक hold कर सकती है। इसलिए कई बार जब कोई व्यक्ति बड़ा अपराध करता है, तो उसकी body का elemental concentration level उसे कुछ समय तक protect कर लेता है। इसी कारण उसे punishment मिलने में बहुत समय लग जाता है।


वहीं जिन लोगों का elemental concentration level weak होता है, उन्हें negative कर्मफल sudden मिलता है। ऐसे लोग तुरंत पकड़े जाते हैं और on the spot punishment भोगते हैं।


इसका conclusion यह है कि हमारी body के पाँच elements का concentration level ही events और actions के outcomes को change करता है।


कोई व्यक्ति एक छोटी गलती की बहुत बड़ी सजा भुगतता है, जबकि कोई व्यक्ति बहुत बड़ी गलती करने के बाद भी कई सालों तक जीवन में enjoy करता रहता है।


लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसे कर्मफल नहीं मिलेगा।


कर्मफल मिलेगा ही।


कभी late मिलता है, कभी बहुत जल्दी मिलता है।


इसीलिए FEAT Theory ABC वह चाबी है, जो जीवन के events और उनके outcomes को समझने में सहायता करती है।


कई बार कर्मफल next life में भी transfer हो जाता है, depending upon the elements.


इसलिए यदि जीवन को सुखमय और संतुलित बनाना है, तो balance बहुत जरूरी है। क्योंकि यही elements हमसे वह actions भी करवा सकते हैं, जो हम consciously कभी करना नहीं चाहते।


Balanced elements हमें गलत actions से बचाते हैं।


लेकिन यदि action हो गया, तो कर्मफल अवश्य आएगा।


इसलिए हर action बहुत सोच-समझकर, awareness के साथ और responsibility के साथ करना चाहिए।


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